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Wednesday, April 7, 2010

जीवन की यात्रा !



जीवन एक यात्रा
शरीर एक यात्री
मन के भाव बने सह-यत्री
मुश्किले और परेशानिया
रस्ते की टेढ़ी-मेढ़ी डगर

आँखें बंद की
तो दिन ढल गया
आँखें खोली तो
सवेरा हो गया

चक्र जो यह चल गया
रास्ता अपने आप मिल गया
चक्र का घूमना जो बंद हुआ
जो मिला था बीच राह, सब खो गया!

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