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Saturday, June 26, 2010

बूँदें घिर आई है!




अहा!
मौसम ने करवट ली है
तपती ऊष्मा की जगह,
मीठी बूंदों ने ली है!

बिजली की तलवार का वार
चाहे हर मन बार-बार
बरसती फुहारों की मार
बरसे है द्वार-द्वार!

पंछियो का कलरव
धरती का यौवन
बूंदों का रस
दृश्य सम्मोहक

झम-झम करके बरसो आज
चऊ दिशा में बजे नाद
मन से मन का हो संवाद
है हर मन ही यही फ़रियाद!

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3 comments:

poeticbreak said...

bahut khoobsoorat!!

akhilesh said...

really awesome lyrics....

you are so creative.. congrats ..

Akhilesh Bhatnagar said...

Happy monsoon

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