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Friday, June 11, 2010

तीन त्रिवेणी-5!




1. उसकी देह रूपी ईमारत
एक झटके में ही ढह गई!

यादों के कंकर अब भी मेरे पाँव में देर तक चुभते है!

2. मन करता है
आज छुप जाऊ उस अँधेरी कोठारी में

जहाँ पर मन को झिंझोर कर वापिस लाना आसन होता है!

3. नदिया सूख गयी
नहरे उजड़ गयी!

हाँ, मैंने भी अब बाँध बनाना सीख लिया है!

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3 comments:

Indli said...

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ana said...

padh kar achcha laga .....achchi rachana hai aapki

Rachana said...

Ana: Bahut shukriya aapka!

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