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Wednesday, September 1, 2010

सूरज दादा!





देखो, पूरब की ओर
हो रही है मधुर भोर
सूरज दादा आते है
अँधेरा दूर भगाते है!
उजाला किरणों का फैला कर
हम सबको जगाते है!
नया दिन और एक नई शुरुआत
याद रखना तुम इतनी सी बात
रोज़ हमें यही सिखलाते है!


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2 comments:

मनोज कुमार said...

सुंदर बाल गीत।
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

Abhishek Agrawal said...

started working on the project so soon :D

good one Rachana

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