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Monday, May 10, 2010

Maa Tum (माँ तुम)




नारी का पहला एहसास, माँ तुम
कोमलता की प्यास, माँ तुम
करुना की दास, माँ तुम
मेरी पहली और आखिरी आस, माँ तुम
मेरे अन्दर की आवाज़, माँ तुम
मेरे चेहरे की हसी, माँ तुम
मन का सुख, माँ तुम
चुटकी में भगाए दुःख, माँ तुम
अँधेरे का झिलमिला दीया, माँ तुम
कठिनाईओ का ज़हर घूंट भर लिया, माँ तुम
जीवन की सुबह की किरण, माँ तुम
मेरी शाम का विवरण, माँ तुम
रातों की मीठी नींद का सपना, माँ तुम
कौन लगे तुझ बिन मुझे अपना, माँ तुम
मेरा सच्चा गहना, माँ तुम

और क्या कहू, क्या हो तुम
मेरी शुरुआत भी तुम
और इसका अंत भी तुम!
है ना, माँ!




Maa Tum!

Naari ka pehla ehsas, maa tum
Komalta ki pyas, maa tum
Karuna ki daas, maa tum
Meri pehli aur aakhiri aas, maa tum
Mere andar ki awaz, maa tum
Mere chehre ki hasi, maa tum
Man ka sukh, maa tum
Chutki mein bhagaaye dukh, maa tum
Andhere ka jhilmila diya, maa tum
Kathinaio ka zehar ghunt bhar liya, maa tum
Jeevan ki subah ki kiran, maa tum
Meri sham ka vivran, maa tum
Raaton ki meethi neend ka sapna, maa tum
Kaun lage tujh bin apna, maa tum
Mera sachcha gehna, maa tum
Aur kya kahu, kya ho tum
Meri shuruhaat bhi tum
Aur iska ant bhi tum!
Hai na! maa!




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3 comments:

VIJI said...

This is a beautiful one. I really liked the line "Jeevan ki subah ki kiran, maa tum". The last line reminds me of a song from one of the recent Amir khan movies about a small boy with dyslexia. Wonderful one.

Viji

abhi said...

मेरे चेहरे की हंसी तो मेरी माँ है ही...इसमें कोई शक नहीं और कविता तो बहुत प्यारी है...मेरी माँ की याद आ रही है मुझे...आज दो-तीन पोस्ट पढ़ लिए हैं अन्य ब्लोग्स पे भी माँ के बारे में और अब मुझे माँ से मिलने का मन करने लगा...मम्मीइइइ :D

- The Virgin Author! said...

A great poem!

-
PS: http://tiny.cc/10fuckups - 10 ways to live life!

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