"A bi-lingual platform to express free ideas, thoughts and opinions generated from an alert and thoughtful mind."

Thursday, July 7, 2011

इंतज़ार

 












सुबह तुम जाते हो 
शाम को लौट आते हो
बीच में रहता है  इंतज़ार

अदभुत् अनोखा  इंतज़ार
इंतज़ार  आस  का
तुम्हारे आभास का
हमारे साथ का
अपने विश्वास का

अच्छा लगता है  इंतज़ार
हमेशा करुँगी
ऐसे ही इंतज़ार !


Related Posts :



4 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 28/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यह इंतज़ार भी सुखद है ..

सदा said...

बेहतरीन ।

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

अति सुन्दर अभिव्यक्ति ..शुभ कामनाएं

Post a Comment