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Monday, June 6, 2011

इन दिनों




इन दिनों
कुछ अजीब सा लगता है
शोर गुल के बीच भी
सन्नाटा गहरा लगता है!

इन दिनों
हलचल सी उठती है
ख़ामोशी की चीख भी
तीखी चुभती है

इन दिनों
मौसम भी मचलता है
पंछियो के नीड़ में
जीवन नया पलता है

इन दिनों
सपने सच्चे लगते है
आईने में उतर
खुशबू नयी बिखेरते है!

इन दिनों
कुछ अजीब सा लगता है

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2 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


आज के खास चिट्ठे ...

कुश्वंश said...

इन दिनों
मौसम भी मचलता है
पंछियो के नीड़ में
जीवन नया पलता है

बेहतरीन शब्दों और भावो से सजी पंक्तियाँ

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