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Tuesday, July 5, 2011

अनोखा चित्र














विहंगम दृश्य है 
मीलों फैला कैनवास है
ना कोई कूची है
ना बनाने वाला चित्रकार है

आकाश ने नीला रंग भर दिया 
तरुनाई ने हरा भी जोड़ दिया
फूलो की रंग बिरंगी आभा भी
चित्र में है गहरी समाई
बरखा की बूंदों जब पास आई 
बिजली की चमकार भी डट कर गुर्राई 

पंछियो के कलरव ने किया इसको जीवंत 
देख कर हुई मैं मगन 
लगता है चित्र पूरा हो गया भाई!

Saturday, July 2, 2011

सपने

















सपने
बंद आँखों
में ही सजते है
एक अनजानी दुनिया में
स्वतंत्रता का एहसास दिलाते है

आँखें खुलते ही
सच्चाईया  समझा देती है
अपने उड़ने की सीमा
अपनी धुंधली स्वंतंत्रता!

Tuesday, June 28, 2011

Eyes


मरते रिश्ते


कुछ रिश्ते
पैदा होने से पहले
निर्धारित कर दिए जाते है

आँखें खोलते ही
हम उन ही रिश्तो का
हुकुम बजाने लगते है

वही रिश्ते
समय के साथ-साथ
हमें सताने लगते है
बोझिल बने, कंधे झुकाने लगते है
फिर भी, तोड़े नही जाते
बस घिसटते जाते है
घाव गहराते जाते है

उसी मन में
जो कभी हरा भरा था!

Monday, June 27, 2011

कारण


लड़ते-लड़ते जब थक गए
बहते-बहते आंसू अब सूख चुके
कहते-कहते अब रुक चुके
सर उठा के मैंने पूछा
क्यूँ लड़ पड़े थे
कुछ याद है तुम्हे?

आँखें झुका के
मुँह मोड़ के
तुमने धीरे से कहा
ठीक से नहीं…
और तुम्हे?

Sunday, June 19, 2011

To Papa With Love!

Happy Father's Day!