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Tuesday, February 21, 2012
क्या अर्थहीन है?
धर्म और फ़र्ज़ की जंग
तो चिर ज्ञात है
इन सबके लिए भावनाओ को कुचलना
कौन सी नई बात है
हमारा मिलना और बिछड़ना
मात्र संयोग नहीं, मरते जज़्बात है
क्या अपनी ख़ुशी का सोचना
इतनी बुरी बात है?
भूल जाओ, ना रखो याद क्यूंकि
मिलती नहीं अपनी जात है
समय बदला, लोग बदले पर
बदले नहीं अपने हालात है
निभाना है, रिसते, घिसते जाना है
आग उगलती दुनिया में आवाज़ की क्या औकात है
बिखरा मन, ख़ाली आँखें
मोहरे बने इंसान की क्या बिसात है
याद है, उस रात जब आंसू बोल रहे थे
लौट आई आज ऐसी ही रात है
यादों के जंगले घेरे खड़े है
गुज़रे लम्हे की कसक बस साथ है
भुला पाओगे? निकाल सकोगे?
भला प्यार से मीठी कौन बात है?
Monday, June 27, 2011
कारण
लड़ते-लड़ते जब थक गए
बहते-बहते आंसू अब सूख चुके
कहते-कहते अब रुक चुके
सर उठा के मैंने पूछा
क्यूँ लड़ पड़े थे
कुछ याद है तुम्हे?
आँखें झुका के
मुँह मोड़ के
तुमने धीरे से कहा
ठीक से नहीं…
और तुम्हे?
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Life,
man,
poems,
relationships,
woman
Monday, November 15, 2010
रिश्तो की कसमसाहट!

रूठ जाते है रिश्ते
बिना शिकायत
टूट जाते है रिश्ते
बिना खटखटाए
ग़ुम हो जाते है रिश्ते
बिना बताये
भुलाये जाते है रिश्ते
बिना नज़रे मिलाये
आँखें बंद करते ही
जड़ हो जाते है रिश्ते
कसमसाहट बन
आवाजें खोते जाते है, रिश्ते!
पुराने और नए
मीठे और खट्टे
तीखे और जायकेदार
हमेशा के लिए
सो जाते है
धीरे-धीरे हाथ से फिसल जाते है, रिश्ते!
Labels:
Life,
poetry,
relationships
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