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Thursday, August 20, 2020

विनाश की महामारी

 विनाश की महामारी

निगलती जाए दुनिया सारी! 


बेदम व्यवस्था

लाचार अवस्था

जज्जर संस्था

तड़पती, घुटती अपनी व्यथा! 


विनाश की महामारी

निगलती जाए दुनिया सारी! 


प्रकृति की उपेक्षा

अधूरी रही शिक्षा

जीवन की भिक्षा

कठिन है परीक्षा! 


विनाश की महामारी

निगलती जाए दुनिया सारी! 


जग जाओ की जीवन शेष हैं

उठ जाओ की बदला परिवेश हैं

भूल जाओ की संशय अब लेश हैं

मुस्कुराओ की आसमाँ में भी छेद हैं! 


विनाश की महामारी

निर्दय अत्याचारी

आ चल करले आज

दो दो हाथ की तैयारी! 


Monday, June 6, 2011

इन दिनों




इन दिनों
कुछ अजीब सा लगता है
शोर गुल के बीच भी
सन्नाटा गहरा लगता है!

इन दिनों
हलचल सी उठती है
ख़ामोशी की चीख भी
तीखी चुभती है

इन दिनों
मौसम भी मचलता है
पंछियो के नीड़ में
जीवन नया पलता है

इन दिनों
सपने सच्चे लगते है
आईने में उतर
खुशबू नयी बिखेरते है!

इन दिनों
कुछ अजीब सा लगता है

Tuesday, July 20, 2010

HOPE!



H orrendous thought process
O ptions limited
P iracy is a crime
E nd is here, where’s Hope!