"A bi-lingual platform to express free ideas, thoughts and opinions generated from an alert and thoughtful mind."
Showing posts with label save tiger. Show all posts
Showing posts with label save tiger. Show all posts

Tuesday, March 30, 2010

Achcha Nahi Lagta! (अच्छा नहीं लगता)



मुझे अच्छा नहीं लगता
सडती विचारधारा को अपनाना
मुझे अच्छा नहीं लगता
अत्याचार करना और सहना
मुझे अच्छा नहीं लगता
मासूम जानवरों को मारना
मुझे अच्छा नहीं लगता
लड़ना और लडवाना
मुझे अच्छा नहीं लगता
बातें सुनना और सुनाना
मुझे अच्छा नहीं लगता
दिखावा करना और जताना
मुझे अच्छा नहीं लगता
बनाये रास्ते पर चलना
मुझे अच्छा नहीं लगता
कोरे सपने देखना
मुझे अच्छा नहीं लगता
व्यर्थ समय नष्ट करना
मुझे अच्छा लगता
आगे बढ़ना और जीतना
सकारात्मक दृष्टिकोण से
प्रयास कर अपने लक्ष्य को पाना !



Achcha Nahi Lagta!

Mujhe achcha nahi lagta
Sadti vichaardhaara ko apnana
Mujhe achcha nahi lagta
Galat baat ko sehna
Mujhe achcha nahi lagta
Masoom jaanwaro ko marna
Mujhe achcha nahi lagta
Ladna aur ladwana
Mujhe achcha nahi lagta
Baatein sunna aur sunaana
Mujhe achcha nahi lagta
Dikhawa karna aur jatana
Mujhe achcha nahi lagta
Banaye raaste par chalna
Mujhe achcha nahi lagta
Kore sapne dekhna
Mujhe achcha nahi lagta
Vyarth samay nasth karna
Mujhe achcha lagta hai
Aage badhna aur Jeetana
Sakaraatmak dhristikon se
prayas karna aur lakshay ko paana!


Sunday, March 7, 2010

Christian the Lion

Love Knows No Limit and Friendship lasts lifetime!

Enjoy watching the video!!!




http://www.youtube.com/watch?v=B0G_ZuBGD-0

Saturday, March 6, 2010

हाय! बाघिन माँ का आँचल खो गया!



वह घुफा के द्वार पर निशब्द खड़ी थी
जहाँ से सारा वातावरण
धुन्धलाये शीशे की तरह
नग्न दिखलाई पड़ रहा था!

चन्द्रमा की उजली किरण में
उसके शरीर की आभा
और भी दमक रही थी!
परन्तु,
उसकी आँखों में भरा दर्द
झलक-झलक कर उस सुने वातावरण को दुखमय बना रहा था!

हौले से वह अपने गर्भ को सहला रही थी
दुःख और पीड़ा से मचल भी रही थी
आँखों का तेज़ अब निस्तेज हो चला था
रात की कालिमा गहराती चली थी

गर्भ के हिल्लोरे
जब बहुत जोर मारे
एक नन्हा शावक
आ गया द्वारे!

मृत रात में जब बूँदें भी पड़ी है बेजान
किसको होगा उसका और शावक का ध्यान
अपनी पीड़ा भुला
देखने लगी क्या उसके गर्भ का फूल खिला?
जो उसके पंजो के बीच
छुपा, सुस्ता रहा था !

प्यार से वह अपने
नवजात शिशु के कोमल शरीर को
चाट-चाट कर साफ़ करने लगी
मानो, उसको पुचकारने लगी तब
बेटे, जीवन को महसूस करो
अपनी माँ की तपस्या फलीभूत करो!

हिलाया, दुलाया
शावक फिर भी रहा मौन
हाय, एक और जीवन का अंत
फर्क अब क्या पड़े
अगर रात के बाद आ भी जाए बसंत!

काली बीती जाए यह रात
खोते जाए जज़्बात
बाघिन माँ खड़ी घुफा के द्वारे
रास्ता ताके, जाने कौन सी दिशा बहे यह बयार!