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Friday, August 10, 2012

अच्छे दिन…फिर लौटेंगे!


अच्छे दिन
मुस्कुराते दिन
खुशियों भरे दिन
फिर लौटेंगे!

उस भूले बिसरे दोस्त की सूरत में 
जो ऐसे ही कही दुबारा टकरा जाए 
और जिसे गले लगाते ही
आँखें एक बूँद छलक जाए
वही दिन…फिर लौटेंगे!

उस धूल लगी इच्छा की आहट में
जो सहसा मन से कोने से निकल 
सामने इठलाती दिखाई दे
और मन मदमस्त चहक जाए
सुनो, ऐसे दिन…फिर लौटेंगे!

नए मौसम के सुहाने रंगों में
नए आशाओं से भरे नूतन जीवन में
खुशबू बिखेरते सुनहरे फूल फिर खिलेंगे 
इंतज़ार है जिसका, वैसे दिन…फिर लौटेंगे!












Wednesday, June 9, 2010

बुलबुलों की कहानी!




कुछ क्षणों की कहानी है
बुलबुलों की जवानी!

सुकोमल जीवन
लगती बेईमानी है, बुलबुलों की जवानी!

पल भर की ख़ुशी
मिट जाना इसकी निशानी है, बुलबुलों की जवानी!

पास बुलाये
आह! बड़ी नीरस कहानी है, बुलबुलों की जवानी!




Bulbule ki kahani!

Kuch kshano ki kahani hai
Bulbulo ki jawani!

Sukomal jeevan
Lagti beimani hai, bulbulo ki jawani!

Pal bhar ki khushi
Mit jana iski nishaani hai, bulbulo ki jawani!

Paas bulaye
Aah! kya kahani hai, bulbulo ki jawani!

अभी मिली ख़ुशी!




बचपन के मासूम दिनों में छुपाये
दस के एक नए नोट
का मिलना
कुछ यूँ लगा
जैसे, दूर उस चमकते तारे
का किनारे का टुकड़ा मिल गया हो
और मेरे हाथ उसकी चांदनी में भीग गए हो!




Abhi mili khushi!

Bachpan ke masoom dino mein chhupaye
Das ke ek naye note
Ka milna
Kuch Yun laga
Jaise, dur us chamakte taare
Ka kinare ka tukda mil gaya ho
Aur mere haath uski chandni mein bhig gaye ho!