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Monday, September 26, 2011

हम-1


हम मिले
साथ चले
चलते रहे
दूर तक
मीलों पार
खोने लगे
रास्ते अपने
मुड़ के देखा
सुकून था

रास्ता जाना पहचाना था
यह वही जा रहा था
जहाँ हमें जाना था!

Saturday, January 29, 2011

एक अलग दुनिया है!




भूल गई थी
तुम्हारी भी एक दुनिया है!

तुम्हारा सूनापन
मेरा अकेलापन

तुम्हारे सूखे होठ
मेरी खिलखिलाती हँसी

तुम्हारे ठहराव
मेरे अन्तरंग भाव

तुम्हारे घाव की टीस
मैं बैठी थी आँखें मीच

जब हम मिले
फूल बहारो में खिले
मिट गए थे सभी फासले
पर भूल गई थी की
तुम्हारी भी एक दुनिया है!

तुम्हारी सीमाएं
तुम्हारी परिस्तिथियाँ
तुम्हारी ऊचाइयाँ
तुम्हारी गहराइया
तुम्हारी सच्चाईया
तुम्हारे नकाब
मुझसे तो अलग है ना!

Monday, August 2, 2010

आँखें!




1. आँखें मेरी दुनिया का झरोखा है
खोल दो तो अन्दर का आसमान साफ़ दिखता है
बंद कर दो तो अन्दर का मैल उभर आता है!

2. आपकी आँखें मेरे जीवन की मार्ग दर्शक है
इसकी रौशनी ही मुझे ले जाती है
उस ओर, जहाँ मेरी नियती खड़ी है!

3. तुम्हारी आखें मेरे जीवन का प्रतिबिम्भ है
लौटा लाती है उन मधुर क्षणों की ओर
जो बाहें पसारे मेरा रास्ता तकती रहती है!

4. तुम्हारी आँखें नदी का ठहरा पानी है
मेरी हिचकोले खाती जीवन रूपी नाव को सहारा देती है
जो बीच मझदार फसी पड़ी है!

5. तुम्हारी आँखें बारिश के जुगनू है
काली बयार में, सहमी और लाचार खड़ी जो मैं
हाथ बढ़ा मुझे थाम लेती है!

Wednesday, June 9, 2010

आप, तुम, और मैं!




आप!

आपका एहसास, आपके नहीं होने से ज्यादा अर्थपूर्ण है
क्षण भर की अनुभूति
खिला देती है फूल बहार के
जगमगा देती है, ज्योति नैन द्वार की!

तुम!

कौन हो तुम?
क्या वही जो बिन कहे चले गए थे?
क्या वही जो बिन बुलाये आये हो?
क्या वही जो आँखों के सामने भी ओझल खड़े हो?
तुम, वही हो ना!

मैं!

आईने में देखती हू जिसे
पहचाना सा लगता है
पल में क्यूँ ना जाने यह मीलो की सैर करता है
आप और तुम की याद में ही धसा रहता है!