Friday, June 17, 2011
Thursday, June 16, 2011
Wednesday, June 15, 2011
Friday, June 10, 2011
बिखर जाने दो!

बिखर जाने दो
टूट जाने दो
मुझे तुम
कहो ना
साथ हो मेरे
सच्चे सारे
ख्वाब है मेरे
आखिर कब तक
संभालोगे?
मौन रह कर
आज पिघल जाने दो
घाव बड़े
दिखने लगे है
सहलाओ ना
आज फूट जाने दो
पता है
थामे हाथ तुम्हारा
संवर जाउंगी
जीना सीख जाउंगी
शायद
इतनी ख़ुशी झेल ना पाऊँगी
आज साथ छूट जाने दो
बिखर जाने दो
टूट जाने दो
खो जाने दो
आज मुझे तुम!
Labels:
Loneliness,
love,
My Life,
poems
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